Oku Surat MudathirSure okuma
وَمَا يَذْكُرُونَ إِلَّآ أَن يَشَآءَ ٱللَّهُ هُوَ أَهْلُ ٱلتَّقْوَىٰ وَأَهْلُ ٱلْمَغْفِرَةِ
Wama yathkuroona illa an yashaa Allahu huwa ahlu alttaqwa waahlu almaghfirati
और वे नसीहत हासिल नहीं करेंगे। यह और बात है कि अल्लाह ही ऐसा चाहे। वही इस योग्य है कि उसका डर रखा जाए और इस योग्य भी कि क्षमा करे
لَآ أُقْسِمُ بِيَوْمِ ٱلْقِيَٰمَةِ
La oqsimu biyawmi alqiyamati
नहीं, मैं क़सम खाता हूँ क़ियामत के दिन की,
وَلَآ أُقْسِمُ بِٱلنَّفْسِ ٱللَّوَّامَةِ
Wala oqsimu bialnnafsi allawwamati
और नहीं! मैं कसम खाता हूँ मलामत करनेवाली आत्मा की
أَيَحْسَبُ ٱلْإِنسَٰنُ أَلَّن نَّجْمَعَ عِظَامَهُۥ
Ayahsabu alinsanu allan najmaAAa AAithamahu
क्या मनुष्य यह समझता है कि हम कदापि उसकी हड्डियों को एकत्र न करेंगे?
بَلَىٰ قَٰدِرِينَ عَلَىٰٓ أَن نُّسَوِّىَ بَنَانَهُۥ
Bala qadireena AAala an nusawwiya bananahu
क्यों नहीं, हम उसकी पोरों को ठीक-ठाक करने की सामर्थ्य रखते है
بَلْ يُرِيدُ ٱلْإِنسَٰنُ لِيَفْجُرَ أَمَامَهُۥ
Bal yureedu alinsanu liyafjura amamahu
बल्कि मनुष्य चाहता है कि अपने आगे ढिठाई करता रहे
يَسْـَٔلُ أَيَّانَ يَوْمُ ٱلْقِيَٰمَةِ
Yasalu ayyana yawmu alqiyamati
पूछता है, "आख़िर क़ियामत का दिन कब आएगा?"
وَجُمِعَ ٱلشَّمْسُ وَٱلْقَمَرُ
WajumiAAa alshshamsu waalqamaru
और सूर्य और चन्द्रमा इकट्ठे कर दिए जाएँगे,
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