Descargo de responsabilidad

Toda la información en islamicFinder.org es verificada por profesionales de antemano. Si encuentre cualquier material inadecuado( o enlaces conduciendo a materiales inadecuadas), Por favor  Contáctenos

Ubicación

Por favor entre nombre de la ubicación actual
Por favor introduzca valores correctos de latitud y longitud.
Por favor seleccione el huso horario.
Por favor seleccione la fecha de inicio del horario de verano
Por favor seleccione la fecha de finalización del horario de verano
Cálculo de oración

para una experiencia más rápida y actualizaciones diarias.

×

para una experiencia más rápida y actualizaciones diarias.

×

Leer Surah MaidahCon traducción

¡Disculpe! no podría encontrar cualquier aleya correspondiente de su busqueda/ palabra

وَٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ وَكَذَّبُوا۟ بِـَٔايَٰتِنَآ أُو۟لَٰٓئِكَ أَصْحَٰبُ ٱلْجَحِيمِ

Waallatheena kafaroo wakaththaboo biayatina olaika ashabu aljaheemi

और जिन लोगों ने कुफ़्र इख्तेयार किया और हमारी आयतों को झुठलाया वह जहन्नुमी हैं (

يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ ٱذْكُرُوا۟ نِعْمَتَ ٱللَّهِ عَلَيْكُمْ إِذْ هَمَّ قَوْمٌ أَن يَبْسُطُوٓا۟ إِلَيْكُمْ أَيْدِيَهُمْ فَكَفَّ أَيْدِيَهُمْ عَنكُمْ وَٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَ وَعَلَى ٱللَّهِ فَلْيَتَوَكَّلِ ٱلْمُؤْمِنُونَ

Ya ayyuha allatheena amanoo othkuroo niAAmata Allahi AAalaykum ith hamma qawmun an yabsutoo ilaykum aydiyahum fakaffa aydiyahum AAankum waittaqoo Allaha waAAala Allahi falyatawakkali almuminoona

ऐ ईमानदारों ख़ुदा ने जो एहसानात तुमपर किए हैं उनको याद करो और ख़ूसूसन जब एक क़बीले ने तुम पर दस्त दराज़ी का इरादा किया था तो ख़ुदा ने उनके हाथों को तुम तक पहुंचने से रोक दिया और ख़ुदा से डरते रहो और मोमिनीन को ख़ुदा ही पर भरोसा रखना चाहिए

وَلَقَدْ أَخَذَ ٱللَّهُ مِيثَٰقَ بَنِىٓ إِسْرَٰٓءِيلَ وَبَعَثْنَا مِنْهُمُ ٱثْنَىْ عَشَرَ نَقِيبًا وَقَالَ ٱللَّهُ إِنِّى مَعَكُمْ لَئِنْ أَقَمْتُمُ ٱلصَّلَوٰةَ وَءَاتَيْتُمُ ٱلزَّكَوٰةَ وَءَامَنتُم بِرُسُلِى وَعَزَّرْتُمُوهُمْ وَأَقْرَضْتُمُ ٱللَّهَ قَرْضًا حَسَنًا لَّأُكَفِّرَنَّ عَنكُمْ سَيِّـَٔاتِكُمْ وَلَأُدْخِلَنَّكُمْ جَنَّٰتٍ تَجْرِى مِن تَحْتِهَا ٱلْأَنْهَٰرُ فَمَن كَفَرَ بَعْدَ ذَٰلِكَ مِنكُمْ فَقَدْ ضَلَّ سَوَآءَ ٱلسَّبِيلِ

Walaqad akhatha Allahu meethaqa banee israeela wabaAAathna minhumu ithnay AAashara naqeeban waqala Allahu innee maAAakum lain aqamtumu alssalata waataytumu alzzakata waamantum birusulee waAAazzartumoohum waaqradtumu Allaha qardan hasanan laokaffiranna AAankum sayyiatikum walaodkhilannakum jannatin tajree min tahtiha alanharu faman kafara baAAda thalika minkum faqad dalla sawaa alssabeeli

और इसमें भी शक नहीं कि ख़ुदा ने बनी इसराईल से (भी ईमान का) एहद व पैमान ले लिया था और हम (ख़ुदा) ने इनमें के बारह सरदार उनपर मुक़र्रर किए और ख़ुदा ने बनी इसराईल से फ़रमाया था कि मैं तो यक़ीनन तुम्हारे साथ हूं अगर तुम भी पाबन्दी से नमाज़ पढ़ते और ज़कात देते रहो और हमारे पैग़म्बरों पर ईमान लाओ और उनकी मदद करते रहो और ख़ुदा (की ख़ुशनूदी के वास्ते लोगों को) क़र्जे हसना देते रहो तो मैं भी तुम्हारे गुनाह तुमसे ज़रूर दूर करूंगा और तुमको बेहिश्त के उन (हरे भरे ) बाग़ों में जा पहुंचाऊॅगा जिनके (दरख्तों के) नीचे नहरें जारी हैं फिर तुममें से जो शख्स इसके बाद भी इन्कार करे तो यक़ीनन वह राहे रास्त से भटक गया

فَبِمَا نَقْضِهِم مِّيثَٰقَهُمْ لَعَنَّٰهُمْ وَجَعَلْنَا قُلُوبَهُمْ قَٰسِيَةً يُحَرِّفُونَ ٱلْكَلِمَ عَن مَّوَاضِعِهِۦ وَنَسُوا۟ حَظًّا مِّمَّا ذُكِّرُوا۟ بِهِۦ وَلَا تَزَالُ تَطَّلِعُ عَلَىٰ خَآئِنَةٍ مِّنْهُمْ إِلَّا قَلِيلًا مِّنْهُمْ فَٱعْفُ عَنْهُمْ وَٱصْفَحْ إِنَّ ٱللَّهَ يُحِبُّ ٱلْمُحْسِنِينَ

Fabima naqdihim meethaqahum laAAannahum wajaAAalna quloobahum qasiyatan yuharrifoona alkalima AAan mawadiAAihi wanasoo haththan mimma thukkiroo bihi wala tazalu tattaliAAu AAala khainatin minhum illa qaleelan minhum faoAAfu AAanhum waisfah inna Allaha yuhibbu almuhsineena

पस हमने उनकीे एहद शिकनी की वजह से उनपर लानत की और उनके दिलों को (गोया) हमने ख़ुद सख्त बना दिया कि (हमारे) कलमात को उनके असली मायनों से बदल कर दूसरे मायनो में इस्तेमाल करते हैं और जिन जिन बातों की उन्हें नसीहत की गयी थी उनमें से एक बड़ा हिस्सा भुला बैठे और (ऐ रसूल) अब तो उनमें से चन्द आदमियों के सिवा एक न एक की ख्यानत पर बराबर मुत्तेला होते रहते हो तो तुम उन (के क़सूर) को माफ़ कर दो और (उनसे) दरगुज़र करो (क्योंकि) ख़ुदा एहसान करने वालों को ज़रूर दोस्त रखता है

وَمِنَ ٱلَّذِينَ قَالُوٓا۟ إِنَّا نَصَٰرَىٰٓ أَخَذْنَا مِيثَٰقَهُمْ فَنَسُوا۟ حَظًّا مِّمَّا ذُكِّرُوا۟ بِهِۦ فَأَغْرَيْنَا بَيْنَهُمُ ٱلْعَدَاوَةَ وَٱلْبَغْضَآءَ إِلَىٰ يَوْمِ ٱلْقِيَٰمَةِ وَسَوْفَ يُنَبِّئُهُمُ ٱللَّهُ بِمَا كَانُوا۟ يَصْنَعُونَ

Wamina allatheena qaloo inna nasara akhathna meethaqahum fanasoo haththan mimma thukkiroo bihi faaghrayna baynahumu alAAadawata waalbaghdaa ila yawmi alqiyamati wasawfa yunabbiohumu Allahu bima kanoo yasnaAAoona

और जो लोग कहते हैं कि हम नसरानी हैं उनसे (भी) हमने ईमान का एहद (व पैमान) लिया था मगर जब जिन जिन बातों की उन्हें नसीहत की गयी थी उनमें से एक बड़ा हिस्सा (रिसालत) भुला बैठे तो हमने भी (उसकी सज़ा में) क़यामत तक उनमें बाहम अदावत व दुशमनी की बुनियाद डाल दी और ख़ुदा उन्हें बहुत जल्द (क़यामत के दिन) बता देगा कि वह क्या क्या करते थे

يَٰٓأَهْلَ ٱلْكِتَٰبِ قَدْ جَآءَكُمْ رَسُولُنَا يُبَيِّنُ لَكُمْ كَثِيرًا مِّمَّا كُنتُمْ تُخْفُونَ مِنَ ٱلْكِتَٰبِ وَيَعْفُوا۟ عَن كَثِيرٍ قَدْ جَآءَكُم مِّنَ ٱللَّهِ نُورٌ وَكِتَٰبٌ مُّبِينٌ

Ya ahla alkitabi qad jaakum rasooluna yubayyinu lakum katheeran mimma kuntum tukhfoona mina alkitabi wayaAAfoo AAan katheerin qad jaakum mina Allahi noorun wakitabun mubeenun

ऐ अहले किताब तुम्हारे पास हमारा पैगम्बर (मोहम्मद सल्ल) आ चुका जो किताबे ख़ुदा की उन बातों में से जिन्हें तुम छुपाया करते थे बहुतेरी तो साफ़ साफ़ बयान कर देगा और बहुतेरी से (अमदन) दरगुज़र करेगा तुम्हरे पास तो ख़ुदा की तरफ़ से एक (चमकता हुआ) नूर और साफ़ साफ़ बयान करने वाली किताब (कुरान) आ चुकी है

يَهْدِى بِهِ ٱللَّهُ مَنِ ٱتَّبَعَ رِضْوَٰنَهُۥ سُبُلَ ٱلسَّلَٰمِ وَيُخْرِجُهُم مِّنَ ٱلظُّلُمَٰتِ إِلَى ٱلنُّورِ بِإِذْنِهِۦ وَيَهْدِيهِمْ إِلَىٰ صِرَٰطٍ مُّسْتَقِيمٍ

Yahdee bihi Allahu mani ittabaAAa ridwanahu subula alssalami wayukhrijuhum mina alththulumati ila alnnoori biithnihi wayahdeehim ila siratin mustaqeemin

जो लोग ख़ुदा की ख़ुशनूदी के पाबन्द हैं उनको तो उसके ज़रिए से राहे निजात की हिदायत करता है और अपने हुक्म से (कुफ़्र की) तारीकी से निकालकर (ईमान की) रौशनी में लाता है और राहे रास्त पर पहुंचा देता है

لَّقَدْ كَفَرَ ٱلَّذِينَ قَالُوٓا۟ إِنَّ ٱللَّهَ هُوَ ٱلْمَسِيحُ ٱبْنُ مَرْيَمَ قُلْ فَمَن يَمْلِكُ مِنَ ٱللَّهِ شَيْـًٔا إِنْ أَرَادَ أَن يُهْلِكَ ٱلْمَسِيحَ ٱبْنَ مَرْيَمَ وَأُمَّهُۥ وَمَن فِى ٱلْأَرْضِ جَمِيعًا وَلِلَّهِ مُلْكُ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا يَخْلُقُ مَا يَشَآءُ وَٱللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَىْءٍ قَدِيرٌ

Laqad kafara allatheena qaloo inna Allaha huwa almaseehu ibnu maryama qul faman yamliku mina Allahi shayan in arada an yuhlika almaseeha ibna maryama waommahu waman fee alardi jameeAAan walillahi mulku alssamawati waalardi wama baynahuma yakhluqu ma yashao waAllahu AAala kulli shayin qadeerun

जो लोग उसके क़ायल हैं कि मरियम के बेटे मसीह बस ख़ुदा हैं वह ज़रूर काफ़िर हो गए (ऐ रसूल) उनसे पूंछो तो कि भला अगर ख़ुदा मरियम के बेटे मसीह और उनकी मॉ को और जितने लोग ज़मीन में हैं सबको मार डालना चाहे तो कौन ऐसा है जिसका ख़ुदा से भी ज़ोर चले (और रोक दे) और सारे आसमान और ज़मीन में और जो कुछ भी उनके दरमियान में है सब ख़ुदा ही की सल्तनत है जो चाहता है पैदा करता है और ख़ुदा तो हर चीज़ पर क़ादिर है

وَقَالَتِ ٱلْيَهُودُ وَٱلنَّصَٰرَىٰ نَحْنُ أَبْنَٰٓؤُا۟ ٱللَّهِ وَأَحِبَّٰٓؤُهُۥ قُلْ فَلِمَ يُعَذِّبُكُم بِذُنُوبِكُم بَلْ أَنتُم بَشَرٌ مِّمَّنْ خَلَقَ يَغْفِرُ لِمَن يَشَآءُ وَيُعَذِّبُ مَن يَشَآءُ وَلِلَّهِ مُلْكُ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا وَإِلَيْهِ ٱلْمَصِيرُ

Waqalati alyahoodu waalnnasara nahnu abnao Allahi waahibbaohu qul falima yuAAaththibukum bithunoobikum bal antum basharun mimman khalaqa yaghfiru liman yashao wayuAAaththibu man yashao walillahi mulku alssamawati waalardi wama baynahuma wailayhi almaseeru

और नसरानी और यहूदी तो कहते हैं कि हम ही ख़ुदा के बेटे और उसके चहेते हैं (ऐ रसूल) उनसे तुम कह दो (कि अगर ऐसा है) तो फिर तुम्हें तुम्हारे गुनाहों की सज़ा क्यों देता है (तुम्हारा ख्याल लग़ो है) बल्कि तुम भी उसकी मख़लूक़ात से एक बशर हो ख़ुदा जिसे चाहेगा बख़ देगा और जिसको चाहेगा सज़ा देगा आसमान और ज़मीन और जो कुछ उन दोनों के दरमियान में है सब ख़ुदा ही का मुल्क है और सबको उसी की तरफ़ लौट कर जाना है

يَٰٓأَهْلَ ٱلْكِتَٰبِ قَدْ جَآءَكُمْ رَسُولُنَا يُبَيِّنُ لَكُمْ عَلَىٰ فَتْرَةٍ مِّنَ ٱلرُّسُلِ أَن تَقُولُوا۟ مَا جَآءَنَا مِنۢ بَشِيرٍ وَلَا نَذِيرٍ فَقَدْ جَآءَكُم بَشِيرٌ وَنَذِيرٌ وَٱللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَىْءٍ قَدِيرٌ

Ya ahla alkitabi qad jaakum rasooluna yubayyinu lakum AAala fatratin mina alrrusuli an taqooloo ma jaana min basheerin wala natheerin faqad jaakum basheerun wanatheerun waAllahu AAala kulli shayin qadeerun

ऐ अहले किताब जब पैग़म्बरों की आमद में बहुत रूकावट हुई तो हमारा रसूल तुम्हारे पास आया जो एहकामे ख़ुदा को साफ़ साफ़ बयान करता है ताकि तुम कहीं ये न कह बैठो कि हमारे पास तो न कोई ख़ुशख़बरी देने वाला (पैग़म्बर) आया न (अज़ाब से) डराने वाला अब तो (ये नहीं कह सकते क्योंकि) यक़ीनन तुम्हारे पास ख़ुशख़बरी देने वाला और डराने वाला पैग़म्बर आ गया और ख़ुदा हर चीज़ पर क़ादिर है

Contact Us

Thanks for reaching out. We'll get back to you soon.

Improve your location’s accuracy

Sometimes we might have trouble finding where you are located. Having your current location will help us to get you more accurate prayer times and nearby Islamic places. Here are some things you can do to help fix the problem.

  1. In the top right, click More
  2. Click Settings and then Show advanced settings.
  3. In the "Privacy" section, click Content settings.
    1. In the dialog that appears, scroll down to the "Location" section. Select one of these permissions:
    2. Allow all sites to track your physical location: Select this option to let all sites automatically see your location.
    3. Ask when a site tries to track your physical location: Select this option if you want Google Chrome to alert you whenever a site wants to see your location.
    4. Do not allow any site to track your physical location: Select this option if don't want any sites to see your location.
  4. Click Done.
  1. Open System Preferences and then Security & Privacy Preferences and then Privacy and then Location Services.
  2. To allow for changes, click the lock in the bottom left.
  3. Check "Enable Location Services."
  1. Turn on location
    1. On your phone or tablet, open the Settings app.
    2. Tap Location.
    3. At the top, switch location on.
    4. Tap Mode and then High accuracy.
    If you still get an error when you open IslamicFinder, follow the step 2.
  2. Open Chrome
    1. In the top right, tap More
    2. Tap Settings.
    3. Under "Advanced", tap Site Settings
    4. Tap Location. If you see a toggle, make sure it turned on and blue.
      1. If you see "Location access is turned off for this device," tap the blue words > on the next Settings screen, tap the toggle to turn on location access.
      2. If you see "blocked" under "Location," tap Blocked > tap IslamicFinder > Clear & reset.
    5. Open IslamicFinder in your mobile browser and refresh the web page
    If you're using a browser other than Chrome, visit your browser's help center by visiting their website.
  1. Turn on location
    1. Open Settings app.
    2. Tap Privacy > Location Services > Safari Websites.
    3. Under "Allow Location Access," tap While Using the app.
  2. Give current location access on your browser
      Safari
    1. Open settings app.
    2. Tap General > Reset.
    3. Tap Reset Location & Privacy.
    4. If prompted, enter your passcode.
    5. You will see a message that says "This will reset your location and privacy settings to factory defaults." Tap Reset Settings.
    6. Open Safari
    7. Go to IslamicFinder
    8. To give Safari access to your location, tap Allow or OK
    9. To give IslamicFinder access to your location, tap OK
  3. If you are using a browser other than Safari, visit your browser's help center by visiting their website.